हिंदू कोड बिल भारतीय समाज के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कानूनी और सामाजिक सुधार था। यह विधेयक भारत में हिंदू समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और कानूनों में समानता और न्याय की स्थापना के उद्देश्य से लाया गया था।
क्या है हिंदू कोड बिल?
हिंदू कोड बिल एक ऐसा विधेयक है, जिसके माध्यम से हिंदू धर्म से संबंधित विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना, और संयुक्त परिवार प्रणाली जैसे विषयों पर कानूनी प्रावधान किए गए। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में समानता लाना और महिलाओं को उनके अधिकार प्रदान करना था।
कब लाया गया और किसने इसे प्रस्तुत किया?
प्रस्तावना और काल: हिंदू कोड बिल का मसौदा पहली बार 1941 में तैयार किया गया। इसे भारत की स्वतंत्रता के बाद, 1947 से 1956 के बीच विभाजित चरणों में लागू किया गया।
डॉ. भीमराव अंबेडकर की भूमिका: यह विधेयक डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रारंभ किया गया था, जो तत्कालीन भारतीय विधि मंत्री थे। उन्होंने 1948 में इसे संविधान सभा में पेश किया।
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कानूनी सुधार के चरण: हिंदू कोड बिल को चार अलग-अलग अधिनियमों में विभाजित कर लागू किया गया:
- हिंदू विवाह अधिनियम, 1955
- हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956
- हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956
- हिंदू अल्पसंख्यक और संरक्षकता अधिनियम, 1956
हिंदू कोड बिल के प्रमुख प्रावधान
विवाह और तलाक के नियम:
- महिलाओं और पुरुषों को विवाह का समान अधिकार दिया गया।
- तलाक लेने का अधिकार पुरुष और महिला दोनों को प्रदान किया गया।
- बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया गया।
उत्तराधिकार का अधिकार:
- महिलाओं को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार दिया गया।
- पुत्र और पुत्री को समान उत्तराधिकार का प्रावधान किया गया।
दत्तक और भरण-पोषण:
- माता-पिता और बच्चों के भरण-पोषण के नियम बनाए गए।
- महिलाओं को भी बच्चों को गोद लेने का अधिकार दिया गया।
संरक्षकता और अधिकार: माता-पिता दोनों को बच्चे के संरक्षक होने का अधिकार दिया गया।
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हिंदू कोड बिल क्यों लाया गया?
- सामाजिक समानता का उद्देश्य: भारतीय समाज में लिंग आधारित असमानता को खत्म करना और महिलाओं को संपत्ति, विवाह और परिवार में समान अधिकार देना।
- ब्रिटिश कानून की खामियां: ब्रिटिश शासन के समय विभिन्न समुदायों के अलग-अलग रीति-रिवाज थे, जिनमें महिलाओं के प्रति भेदभाव होता था।
- नव स्वतंत्र भारत का दृष्टिकोण: स्वतंत्रता के बाद समाज सुधार और समानता को बढ़ावा देना और संविधान में दिए गए समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) को सुनिश्चित करना।
हिंदू कोड बिल में आ गई बाधाएं
- परंपरावादियों का विरोध: कई परंपरावादी नेताओं और संगठनों ने इसे हिंदू धर्म की परंपराओं पर आघात बताया।
- राजनीतिक बाधाएं: तत्कालीन संसद में हिंदू कोड बिल का विरोध हुआ।
- सामाजिक विरोध: महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा ने कई रूढ़िवादी समाजों में नाराजगी पैदा की।
- अंबेडकर का इस्तीफा: इन बाधाओं के कारण डॉ. भीमराव अंबेडकर को विधि मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
क्यों हुआ हिंदू कोड बिल का विरोध?
- धार्मिक हस्तक्षेप का आरोप: कई धार्मिक नेताओं ने इसे धर्म और परंपरा के विरुद्ध बताया।
- संपत्ति का मुद्दा: महिलाओं को संपत्ति में अधिकार देने पर परिवारों में विवाद होने की आशंका जताई गई।
- सामाजिक ढांचे में बदलाव: गोद लेने और संरक्षकता जैसे मुद्दों ने पारंपरिक परिवार संरचना को चुनौती दी।
- राजनीतिक विभाजन: कुछ नेताओं ने इसे वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा बताया।
हिंदू कोड बिल का महत्व क्या है?
- महिला सशक्तिकरण: इस विधेयक ने महिलाओं को कानूनी और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया।
- सामाजिक न्याय: समाज में पितृसत्तात्मक प्रणाली को चुनौती दी गई।
- सामाजिक सुधार का कदम: यह विधेयक भारत में सामाजिक सुधारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था।
हिंदू कोड बिल भारतीय समाज में कानूनी और सामाजिक बदलाव का प्रतीक है। यह न केवल महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करता है, बल्कि समाज में समानता और न्याय की स्थापना का मार्ग भी प्रशस्त करता है। डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व ने इसे संभव बनाया और यह भारतीय लोकतंत्र व संविधान की जीत का प्रतीक है।
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